Kanchan Didi Ko Car Chalana Sikhaya New! -

शुरुआती दो घंटे सिर्फ क्लच छोड़ने और धीरे से गाड़ी को आगे बढ़ाने के अभ्यास में बीते। कई बार गाड़ी झटके खाकर बंद हुई, जो हर नए ड्राइवर के साथ होता है।

जब भी दीदी को मुड़ने के लिए इंडिकेटर देने को कहा जाता, वह घबराहट में वाइपर चालू कर देती थीं। यह एक ऐसी गलती है जो लगभग हर नया ड्राइवर करता है।

Jab maine yeh sab socha, toh mujhe laga — azaadi nahi doge toh aurat kabhi self-sufficient nahi banegi. kanchan didi ko car chalana sikhaya

कांचन दीदी को कार चलाना सिखाने का यह सफर हम दोनों के लिए काफी सीखने वाला रहा। मैंने सीखा कि कैसे धैर्य और सकारात्मक सोच के साथ किसी की मदद की जा सकती है। कांचन दीदी ने सीखा कि उम्र, लिंग या कोई और कारण किसी को उसके सपने पूरे करने से नहीं रोक सकता।

शुरुआती दो-तीन दिन हमने किसी भी व्यस्त सड़क पर जाने से परहेज किया। कंचन दीदी को सिखाने के लिए एक बड़ा और खाली मैदान चुना गया। kanchan didi ko car chalana sikhaya

यहाँ दीदी ने बिना किसी दबाव के कार को पहले गियर में उठाना (Half-clutch तकनीक) सीखा।

मोड़ पर स्टेयरिंग को कितना घुमाना है और वापस कब सीधा करना है, इसे समझने में उन्हें दो दिन का समय लगा। kanchan didi ko car chalana sikhaya

अचानक सामने आने वाले स्पीड ब्रेकर पर गाड़ी को धीमा करना सीखा।

If you want to know more about teaching someone how to drive, let me know:

सबसे पहले मैंने कांचन दीदी को स्टीयरिंग पर कंट्रोल करना सिखाया। उन्होंने सीधे लाइन में गाड़ी चलाने से शुरुआत की और फिर धीरे-धीरे मोड़ लेना सीखा। स्टीयरिंग स्मूदली घुमाने की कला में महारत हासिल करने में उन्हें कुछ समय लगा, लेकिन वह जल्दी ही सीख गईं।

कई बार गाड़ी को टेढ़ा खड़ा करने और बार-बार आगे-पीछे करने के बाद, आखिरकार 15वें दिन कंचन दीदी ने गाड़ी को दो लाइनों के बीच में बिल्कुल परफेक्ट पार्क कर दिया। वह उनकी सबसे बड़ी जीत थी।

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जब भी दीदी को मुड़ने के लिए इंडिकेटर देने को कहा जाता, वह घबराहट में वाइपर चालू कर देती थीं। यह एक ऐसी गलती है जो लगभग हर नया ड्राइवर करता है।

Jab maine yeh sab socha, toh mujhe laga — azaadi nahi doge toh aurat kabhi self-sufficient nahi banegi.

कांचन दीदी को कार चलाना सिखाने का यह सफर हम दोनों के लिए काफी सीखने वाला रहा। मैंने सीखा कि कैसे धैर्य और सकारात्मक सोच के साथ किसी की मदद की जा सकती है। कांचन दीदी ने सीखा कि उम्र, लिंग या कोई और कारण किसी को उसके सपने पूरे करने से नहीं रोक सकता।

शुरुआती दो-तीन दिन हमने किसी भी व्यस्त सड़क पर जाने से परहेज किया। कंचन दीदी को सिखाने के लिए एक बड़ा और खाली मैदान चुना गया।

यहाँ दीदी ने बिना किसी दबाव के कार को पहले गियर में उठाना (Half-clutch तकनीक) सीखा।

मोड़ पर स्टेयरिंग को कितना घुमाना है और वापस कब सीधा करना है, इसे समझने में उन्हें दो दिन का समय लगा।

अचानक सामने आने वाले स्पीड ब्रेकर पर गाड़ी को धीमा करना सीखा।

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सबसे पहले मैंने कांचन दीदी को स्टीयरिंग पर कंट्रोल करना सिखाया। उन्होंने सीधे लाइन में गाड़ी चलाने से शुरुआत की और फिर धीरे-धीरे मोड़ लेना सीखा। स्टीयरिंग स्मूदली घुमाने की कला में महारत हासिल करने में उन्हें कुछ समय लगा, लेकिन वह जल्दी ही सीख गईं।

कई बार गाड़ी को टेढ़ा खड़ा करने और बार-बार आगे-पीछे करने के बाद, आखिरकार 15वें दिन कंचन दीदी ने गाड़ी को दो लाइनों के बीच में बिल्कुल परफेक्ट पार्क कर दिया। वह उनकी सबसे बड़ी जीत थी।